जैसन को तैसन: हरेश्वर राय
जैसन को तैसन: हरेश्वर राय बात बहुत पुरानी है। जितौरा नाम की एक छोटी सी रियासत थी। इस रियासत के मालिक थे महाराज झौवा सिंह। झौवा सिंह की इस रियासत के अंतर्गत बचरी नाम का एक गाँव था। इस गाँव में बैकुंठ नाई एवं यमुना पंडित नामक दो व्यक्ति रहा करते थे। दोनों में प्रगाढ़ मित्रता थी। एक समय की बात है। बैकुंठ को एक अति आवश्यक कार्य से कुछ दिनों के लिए गाँव छोड़कर शहर जाने की आवश्यकता आ पड़ी। उसके पास चाँदी की एक चमचमाती कटार थी जिसे वह चोरी के डर से अपने सूने घर में छोड़कर नहीं जाना चाहता था। अतः अपने प्रस्थान के पूर्व उसने अपनी समस्या अपने मित्र यमुना पंडित को बताई। बैकुंठ की समस्या का समाधान बताते हुए यमुना पंडित ने कहा- “अरे मित्र, भला यह भी कोई समस्या है। अपनी कटार तुम मेरे पास छोड़ जाओ और वापस आते ही तुम उसे पुनः ले लेना।” यमुना पंडित की सलाह मानकर बिना किसी हिचकिचाहट के बैकुंठ ने अपनी कटार अपने मित्र को सौंप दी तथा निश्चिंत होकर वह शहर के लिए प्रस्थान कर गया। नाई की चमचमाती कटार देखकर पंडित के अंदर लालच ने घर कर लिया। कटार के प्रति उसे बहुत मोह हो गया। मन ही मन उसने कटार को वापस न लौट...